कांग्रेस में जश्न ,भाजपा में मातम

संतोष पांडेय


रीवा! रीवा जिले में भले ही सूखे के हालात हैं मगर ढाई दशक बाद कांग्रेस को सूखे से निजात मिल गई है .गोश्वामी तुलसी बाबा ने लिखा है “प्रभुता पाई काहिं मद नाहीं” यह चौपाई भाजपा के ऊपर सौ फीसदी फिट बैठती है .विंध्य क्षेत्र के सफेदपोश यहां की जनता को अपने पैर की जूती समझ बैठे थे,उधर -जनता भी बदला लेने की फिराक में थी मौका मिला तो ऐसा करारा जबाब दिया कि सबकी धनुही धरी की धरी रह गई .त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से लेकर मेयर के चुनाव में पार्टी की जो दुर्गति हुई है उसकी किसी ने कल्पना तक नही की थी ।लेकिन ये पब्लिक है उसे सब पता है कब क्या करना है .बुधवार को मेयर चुनाव की मतगणना के बाद रीवा का जो नतीजा सामने आया उसने भाजपा नेताओं को घरों के अंदर मुँह छिपाकर दुबकने पर मजबूर कर दिया.दरअसल, जिले के भाजपा नेता जनता को नही स्वयं को भगवान समझने लगे थे, सत्ता के मद में इस कदर चूर थे कि उन्हें यह लगने लगा था कि किसी को भी टिकट दिलाकर चुनाव की बैतरणी पार कर लेंगे मगर ऐसा नही हुआ और कांग्रेस के अजय ने भाजपा का अजेय किला नेस्तानाबूद कर दिया .कांग्रेस में जहां जश्न का माहौल है वहीं भाजपा मातम मना रही है.


राजेन्द्र,जनार्दन की जोड़ी नाकाम
जाहिर है कि प्रबोध व्यास को मेयर की टिकट पूर्व मंत्री एवं  मौजूदा विधायक राजेन्द्र शुक्ल की कृपा से मिली थी.श्री शुक्ल को यह भी घमंड था कि वे अकेले दम पर चुनाव जीता लेंगे,हलाकि सांसद जनार्दन मिश्र भी राजेन्द्र शुक्ल के कृपापात्र हैं लिहाजा चुनाव जीतने की जिम्मेदारी सांसद के सिर पर भी थी दोनों ने मसक्कत भी की लेकिन किसी विधायक की मदद भी नही ली जबकि रीवा जिले की अधिकांस विधायकों का निवास रीवा में ही है.

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